Jharkhand : राज्य के पश्चिमी सिंहभूम जिले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने माओवादी गतिविधियों से जुड़े एक मामले में नौ ठिकानों पर छापेमारी की. यह कार्रवाई प्रतिबंधित सीपीआई (माओवादी) संगठन के संदिग्ध सदस्यों और ओवर ग्राउंड वर्कर्स (OGWS) के परिसरों पर की गई. NIA की टीमों ने तलाशी के दौरान मोबाइल फोन, मेमोरी कार्ड, सिम कार्ड और अन्य आपत्तिजनक सामग्री जब्त की है. इससे पहले भी इस मामले में नकदी और अन्य सामग्री बरामद की जा चुकी है, जो संगठन की गैरकानूनी गतिविधियों में उपयोग की जाती थीं.
इस मामले में हुई छापेमारी
यह मामला मार्च 2024 में झारखंड के चाईबासा जिले के टोंटो थाना क्षेत्र में दर्ज किया गया था. प्रारंभिक जांच में पांच आरोपियों को नामित किया गया था. जुलाई 2024 में NIA ने इस मामले को अपने हाथों में लिया. इस मामले की शुरुआत सीपीआई (माओवादी) के एक सदस्य राजेश देवगम की गिरफ्तारी और उसके खुलासे से हुई थी. उसकी जानकारी के आधार पर हुसिपी और राजभासा गांवों के बीच के जंगलों से आपत्तिजनक सामग्री और नकदी बरामद की गई थी. इनमें 10,50,000 रुपये नकद, वॉकी-टॉकी, सैमसंग टैबलेट, रेडियो सेट, लेवी वसूली रसीदें, जिलेटिन की छड़ें, और अन्य माओवादी सामग्री शामिल थी.
गैरकानूनी गतिविधियां बढ़ाने में इनकी हुई पहचान
जांच के दौरान कुछ संदिग्धों और ओवर ग्राउंड वर्कर्स की पहचान हुई, जो सीपीआई (माओवादी) के वरिष्ठ कैडरों और नामित आरोपियों को सैन्य सहायता प्रदान करने में शामिल थे. NIA का मानना है कि ये लोग संगठन की गैरकानूनी गतिविधियों को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे थे. वैसे, NIA ने इन छापेमारियों के जरिए माओवादी नेटवर्क को कमजोर करने की दिशा में एक और कदम बढ़ाया है. बरामद सामग्रियों की जांच के बाद संदिग्धों और उनकी गतिविधियों से जुड़े नए खुलासे होने की संभावना है.
जारी रहेगा NIA का अभियान, बढ़ेगा जांच का दायरा
NIA अधिकारियों की मानें तो आगे जांच के दायरे को और बढ़ाते हुए अन्य संभावित संदिग्धों की पहचान और उन्हें पकड़ने के लिए अभियान जारी रहेगा. यह कार्रवाई राज्य में माओवादी गतिविधियों पर रोक लगाने की दिशा में एक अहम पहल है.